सिर्फ दो बार तराजू का इस्तेमाल कर के आप नकली सिक्के की पहचान कैसे करेंगे???

प्रश्न – मान लिजिए आपके पास 8 सिक्के हैं। सारे सिक्के देखने मे बिलकुल एक जैसे हैं लेकिन उनमे से एक सिक्का नकली है। नकली सिक्का बाकी के सिक्को से थोड़ा भारी है। आपके पास एक तराजू है किंतु बाट नही है। तराजू पर आप केवल दो ही बार ही तौल सकते हैं। तो बताइए सिर्फ दो बार तराजू का इस्तेमाल कर के आप नकली सिक्के की पहचान कैसे करेंगे???
उत्तर देखने से पहले अपने बुद्धिबल का प्रयोग करें और अपने दोस्तो से भी शेयर करें।
उत्तर–
पहले तीन-तीन सिक्के निकालकर तराजू के पलड़ो पर रखें। अगर दोनो पलड़े बराबर हैं तो इसका मतलब बाकी बचे दो सिक्को मे एक नकली सिक्का है। अब उन दोनो सिक्को को एक-एक पलड़े मे रखकर तौलें जो पलड़ा भारी होगा उस पर रखा सिक्का नकली होगा।
लेकिन अगर तीन-तीन सिक्के रखने पर एक पलड़ा भारी हुआ तो उस पलड़े मे रखे तीन सिक्को मे से एक सिक्का नकली होगा। अब उन तीन सिक्को को लेकर उन मे से दो को एक-एक पलड़े पर रखे अगर दोनो पलड़े बराबर हुए तो तीसरा बचा हुआ सिक्का नकली है। और दोनो मे से एक पलड़ा भारी हुआ तो भारी पलड़े वाला सिक्का नकली है।





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उलझेंगे तो सुलझेंगे भी, उलझेंगे ही नहीं तो सुलझेंगे कैसे?
पर उलझे ही रहने में भी किसी किसी को सुख महसूस होता है और कुछ लोग इस डर से कि रहने दो, कौन उलझे, जिन्दगी भर / अन्त तक दुविधा में ही पड़े रहते हैं । अपनी अपनी प्रकृति है, कोऊ काहू में मगन, कोऊ काहू में मगन ! किन्तु कुछ लोग सिर्फ इसलिए भी उलझन में फँसे रहते हैं क्योंकि वे यथार्थ से पलायन करना चाहते हैं, यथार्थ को देखना तक नहीं चाहते । यथार्थ को जानना / समझना भी उन्हें अनावश्यक झमेला प्रतीत होता है ! सुविधापसंद ऐसे लोग भी अपने तरीके से सुखी / दुःखी होने के लिए मज़बूर / स्वतंत्र तो होते ही हैं !  

ज्यादातर लोगों को मुश्किल लगने वाले दिमागी सवाल हल करने में मजा आता है। कुछ सवाल तो ऐसे होते हैं जिसे सुनने के बाद लोग हार मान जाते हैं कि उनसे नही होगा तो कुछ लोग उसमे पर्सनल इंटरेस्ट लेते हैं और उस सवाल को हल कर के हीं मानते हैं। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसे हीं सवाल जिसे हल करना सभी के बस की बात नही होती है।
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