चाॅकलेट्स को उन बाक्स मे इस ढ़ंग से रखे कि किसी भी संख्या मे चाॅकलेट मांगे जाने पर वह सीधे बाक्स ही दे

एक आदमी अपनी छोटी बहन के लिए 1000 चाॅकलेट्स और 10 खाली बाक्स लेकर आता है।वह अपनी बहन से कहता है कि वह उन चाॅकलेट्स को उन बाक्स मे इस ढ़ंग से रखे कि किसी भी संख्या मे चाॅकलेट मांगे जाने पर वह सीधे बाक्स ही दे, बाक्सेस को बिना खोले और उसमे चाॅकलेट की संख्या कम या ज्यादा किए बिना।अगर उसने ऐसा कर लिया तो सारे चाॅकलेट्स उसके हो जाएंगे।अगर आप उसकी जगह पर हों तो इस मुश्किल को कैसे हल करेंगे।
उत्तर तो हमने नीचे दिया है, पर उत्तर देखने के पहले आप अपने दिमाग के घोड़े जरूर दौड़ाएं।
उत्तर- चाॅकलेट्स को हम बाक्स मे कुछ इस तरह से रखेंगे,
बाक्स 1 = 1चाॅकलेट
बाक्स 2 = 2 चाॅकलेट
बाक्स 3 = 4 चाॅकलेट
बाक्स 4 = 8 चाॅकलेट
बाक्स 5 = 16 चाॅकलेट
बाक्स 6 = 32 चाॅकलेट
बाक्स 7 = 64 चाॅकलेट
बाक्स 8 = 128 चाॅकलेट
बाक्स 9 = 256 चाॅकलेट
अब बची हुई चाॅकलेट्स यानि कि 489 चाॅकलेट्स को हम बाक्स नंबर 10 मे रख देंगे।अब आप कोई भी संख्या मे चाॅकलेट चाहेंगे तो आपको बाक्स मिलेंगे, उनमे रखे चाॅकलेट्स मे बिना किसी हेर फेर के।अपने दोस्तो से इस पोस्ट को शेयर कर उनका भी बुद्धि परीक्षण करें।





यह पोस्ट कोपीराईट है-
उलझेंगे तो सुलझेंगे भी, उलझेंगे ही नहीं तो सुलझेंगे कैसे?
पर उलझे ही रहने में भी किसी किसी को सुख महसूस होता है और कुछ लोग इस डर से कि रहने दो, कौन उलझे, जिन्दगी भर / अन्त तक दुविधा में ही पड़े रहते हैं । अपनी अपनी प्रकृति है, कोऊ काहू में मगन, कोऊ काहू में मगन ! किन्तु कुछ लोग सिर्फ इसलिए भी उलझन में फँसे रहते हैं क्योंकि वे यथार्थ से पलायन करना चाहते हैं, यथार्थ को देखना तक नहीं चाहते । यथार्थ को जानना / समझना भी उन्हें अनावश्यक झमेला प्रतीत होता है ! सुविधापसंद ऐसे लोग भी अपने तरीके से सुखी / दुःखी होने के लिए मज़बूर / स्वतंत्र तो होते ही हैं !  

ज्यादातर लोगों को मुश्किल लगने वाले दिमागी सवाल हल करने में मजा आता है। कुछ सवाल तो ऐसे होते हैं जिसे सुनने के बाद लोग हार मान जाते हैं कि उनसे नही होगा तो कुछ लोग उसमे पर्सनल इंटरेस्ट लेते हैं और उस सवाल को हल कर के हीं मानते हैं। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसे हीं सवाल जिसे हल करना सभी के बस की बात नही होती है।

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