दिमागों वाला प्रश्न- 100 लोग एक लाइन में खड़े हैं. नंबर 1 से नंबर 100 तक.

दिमागों वाला प्रश्न- 100 लोग एक लाइन में खड़े हैं. नंबर 1 से नंबर 100 तक.


नंबर 1 के पास एक तलवार हैं, वो अपने से अगले (नंबर 2) को मारकर तलवार को उसके अगले (नंबर 3) को दे देता हैं, इसी प्रकार सभी लोग अपने से अगले आदमी को मारकर उसके अगले आदमी को तलवार दे देते हैं . (नंबर 3 नंबर 4 को मारकर तलवार नंबर 5 को दे देता हैं और इसी प्रकार चक्र चलता हैं)
अगर ऐसे ही चलता रहे और बचे हुए लोगो के बीच में ये चक्र दोहराया जाए, जब तक की सिर्फ़ एक आदमी शेष बचे तो कौन से नंबर का आदमी अंत में अकेला बचेगा?



जवाब- 99 नंबर का आदमी को 100 को मारकर


यह पोस्ट कोपीराईट है-
उलझेंगे तो सुलझेंगे भी, उलझेंगे ही नहीं तो सुलझेंगे कैसे?
पर उलझे ही रहने में भी किसी किसी को सुख महसूस होता है और कुछ लोग इस डर से कि रहने दो, कौन उलझे, जिन्दगी भर / अन्त तक दुविधा में ही पड़े रहते हैं । अपनी अपनी प्रकृति है, कोऊ काहू में मगन, कोऊ काहू में मगन ! किन्तु कुछ लोग सिर्फ इसलिए भी उलझन में फँसे रहते हैं क्योंकि वे यथार्थ से पलायन करना चाहते हैं, यथार्थ को देखना तक नहीं चाहते । यथार्थ को जानना / समझना भी उन्हें अनावश्यक झमेला प्रतीत होता है ! सुविधापसंद ऐसे लोग भी अपने तरीके से सुखी / दुःखी होने के लिए मज़बूर / स्वतंत्र तो होते ही हैं !  

ज्यादातर लोगों को मुश्किल लगने वाले दिमागी सवाल हल करने में मजा आता है। कुछ सवाल तो ऐसे होते हैं जिसे सुनने के बाद लोग हार मान जाते हैं कि उनसे नही होगा तो कुछ लोग उसमे पर्सनल इंटरेस्ट लेते हैं और उस सवाल को हल कर के हीं मानते हैं। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसे हीं सवाल जिसे हल करना सभी के बस की बात नही होती है।
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