*समय समय पर दिमाग की कसरत होनी चाहिए*

एक व्यक्ती अपनी 3 बहनों से मिलने कुछ रकम लेकर घर से निकला।
पहले दिन वो बड़ी बहन के घर गया।
जब वो स्नान करने गया तो बड़ी बहन ने भाई के कपड़ों की जेबों की तलाशी ली। जितनी रकम जेब में थी, उतनी ही रकम बड़ी बहन ने अपने पास से मिलाकर वापस भाई की जेब में रख दी।
विदा लेते समय भाई ने बहन को 2000 रुपए दिए।
अगले दिन भाई मंझली बहन के घर गया।
भाई के स्नान को जाते ही मंझली बहन ने भी तलाशी ली और जेब में जितनी रकम थी उतनी ही अपनी तरफ से मिलाकर भाई की जेब में रख दी।
विदा लेते समय भाई ने बहन को 2000 रुपए दिए।
अगले दिन भाई छोटी बहन के घर गया।
छोटी बहन ने भी जेब की रकम के बराबर रकम भाई की जेब में रख दी।
विदा लेते समय भाई ने छोटी बहन कक 2000 रुपए दिए।
घर पहुँचने पर भाई की जेब में 5000 रुपए बचे हुए थे।
तो अब सवाल ये है कि,
तीनों बहनों से मिलने के लिए भाई, कितनी रकम लेकर निकल था ????
समय समय पर दिमाग की कसरत होनी चाहिए
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जवाब - 2375 रुपये.

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यह पोस्ट कोपीराईट है-
उलझेंगे तो सुलझेंगे भी, उलझेंगे ही नहीं तो सुलझेंगे कैसे?
पर उलझे ही रहने में भी किसी किसी को सुख महसूस होता है और कुछ लोग इस डर से कि रहने दो, कौन उलझे, जिन्दगी भर / अन्त तक दुविधा में ही पड़े रहते हैं । अपनी अपनी प्रकृति है, कोऊ काहू में मगन, कोऊ काहू में मगन ! किन्तु कुछ लोग सिर्फ इसलिए भी उलझन में फँसे रहते हैं क्योंकि वे यथार्थ से पलायन करना चाहते हैं, यथार्थ को देखना तक नहीं चाहते । यथार्थ को जानना / समझना भी उन्हें अनावश्यक झमेला प्रतीत होता है ! सुविधापसंद ऐसे लोग भी अपने तरीके से सुखी / दुःखी होने के लिए मज़बूर / स्वतंत्र तो होते ही हैं !  

ज्यादातर लोगों को मुश्किल लगने वाले दिमागी सवाल हल करने में मजा आता है। कुछ सवाल तो ऐसे होते हैं जिसे सुनने के बाद लोग हार मान जाते हैं कि उनसे नही होगा तो कुछ लोग उसमे पर्सनल इंटरेस्ट लेते हैं और उस सवाल को हल कर के हीं मानते हैं। चलिए आज जानते हैं कुछ ऐसे हीं सवाल जिसे हल करना सभी के बस की बात नही होती है।
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